सुरत हादसे से भी नहीं लिया सबक : प्रशासनिक पेंच में फंसा कोचिंग संस्थानों का निबंधन

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जिले के कोचिग संस्थानों में मानक का पालन नहीं हो रहा है। सुरक्षा के मामले में स्थिति काफी भयावह है। संकरी गली, सड़क के किनारे, नदी और बांध के किनारे, जर्जर मकान और अस्त-व्यस्त कमरों में कोचिग का संचालन हो रहा है। कोचिग संस्थानों के मानक का पालन नहीं करने का सबसे बड़ा कारण है, उनका निबंधित नहीं होना।

जिले में 1500 से अधिक कोचिग संस्थान चल रहे हैं। इनमें अकेले 350 कोचिग सीतामढ़ी शहर में ही चल रहे हैं। हैरत की बात यह कि इनमें एक भी कोचिग संस्थान निबंधित नहीं है और नहीं बिहार कोचिग संस्थान अधिनियम 2010 का पालन कर रहे हैं। सरकार ने साल 2010 में बिहार कोचिग संस्थान अधिनियम 2010 लागू किया था। इसके तहत कोचिग संस्थानों को निबंधन कराना था।


वर्षों तक इस अधिनियम पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। वर्ष 2016 में निबंधन की पहल शुरू हुई। वर्ष 2017 में निबंधन के लिए आवेदन पत्र लिए गए। इसके बाद 191 कोचिग संस्थानों के निबंधन की प्रक्रिया शुरू तो की गई, लेकिन दो साल बाद भी निबंधन की प्रक्रिया फाइलों में कैद है। इसका फायदा निजी कोचिग संचालक उठा रहे है। कोचिग संस्थानों के निबंधन के लिए समिति भी बनाई गई थी। समिति में डीएम को अध्यक्ष बनाया गया था। जबकि एसपी, डीइओ और अंगीभूत कॉलेज के प्राचार्यों को बतौर सदस्य बनाया गया था।

Sources : Dainik Jagran.




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