सीतामढ़ी न्यायालय में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और डीजीपी के खिलाफ परिवाद दायर

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महाराष्ट्र के पालघर में हुए दो साधु और उनके एक अन्य सहयोगी की हत्या के मामले में सीतामढ़ी व्यवहार न्यायालय में एक वकील ने परिवाद दायर किया है. सीतामढ़ी के अधिवक्ता चंदन कुमार सिंह ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे डीजीपी सुबोध कुमार जयसवाल और मंत्रिमंडल में शामिल सभी मंत्रियों के विरुद्ध न्यायालय के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय में परिवाद दाखिल किया है.

परिवाद पत्र दायर करने वाले अधिवक्ता चंदन सिंह ने महाराष्ट्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा है कि जब महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण को लेकर लॉक डाउन और धारा 144 लगाया गया था तो ऐसे हालात में साधुओं की हत्या कैसे हो गई ? हत्या के पीछे महाराष्ट्र के मुख्य-मंत्री उद्धव ठाकरे, डीजीपी और उनके मंत्रिमंडल में शामिल मंत्री है इसलिए सभी दोषियों के विरुद्ध सीतामढ़ी थाने में प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए. उन्होंने कहा कि इससे हिंदुओं की भावना आहत हुई है और इस हत्या से हिंदू समुदाय बेहद दुखी है.


चंदन सिंह ने आरोप लगाया कि पालघर में साधुओं की निर्मम हत्या उद्धव ठाकरे और पुलिस महानिरीक्षक की मिलीभगत से कराई गई है. मामले को मॉब लिंचिंग का नाम दिया जा रहा है जबकि पूरे महाराष्ट्र में लॉक डाउन और धारा 144 लागू है तो सड़क पर भीड़ कहां से आ गई ? अधिवक्ता का आरोप है कि हिंदू धर्म के साधुओं की हत्या से पूरे देश में हिंदुओं के बीच आक्रोश है जिसे देश के अंदर दंगा – फसाद होने की संभावना है.

अधिवक्ता चंदन सिंह ने सीतामढ़ी लाइव को फोन पर हुई बातचीत में बताया कि उन्होंने सीतामढ़ी व्यवहार न्यायालय के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के पास परिवाद दिया है. कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए 23 अप्रैल का दिन तय किया है. गुरुवार को वह पूरी तैयारी के साथ अपनी बात न्यायालय के समक्ष रखेंगे.

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