सीतामढ़ी में बीते तीन सालों में घटा है क्राइम का ग्राफ, पढ़िए पूरी रिपोर्ट

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सीतामढ़ी जिले में आए दिन गोली चलने की खबरें सामने आती रही है. जिले में हत्या के मुकाबले सड़क हादसों से मरने वालों की संख्या अधिक है. यह हम नहीं, नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े कह रहे हैं.

सीतामढ़ी लाइव की टीम ने बीते 3 वर्षों के राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के जिला अनुसार अपराधों की संख्या का एनालाइज किया है. इस क्रम में पाया गया है कि सीतामढ़ी जिले में बीते 3 वर्षों (2018, 2019 व 2020) में संज्ञेय अपराध के मामले कम हुए हैं.


राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2018 में सीतामढ़ी जिले में कुल 7431 संज्ञेय अपराध के मामले दर्ज हुए थे जबकि वर्ष 2019 में इसकी संख्या घटकर 7059 रह गई. वहीं, वर्ष 2020 में अक्टूबर तक 5580 मामले दर्ज हुए. यदि पूरे 2020 का औसतन निकाले तो भी यह संख्या 6500 के आसपास होगी.

इसके अलावा राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों (2018-20) की माने तो जिले में प्रतिवर्ष औसतन 70 हत्या के, 15 डकैती के, 60 लूटपाट के, 140 सेंधमारी कर चोरी के, 850 चोरी के, 100 दंगे के, 400 अपहरण के, बलात्कार के 36, सड़क पर डकैती के 3 मामले दर्ज हो रहे है.

यह सभी आंकड़े वर्ष 2018 से 2020 के अक्टूबर महीने तक के है. हालांकि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के पास उन्हीं मामलों की जानकारी होती है जो किसी थाने में दर्ज हुई हो. इन आंकड़ों में गैर संज्ञेय अपराध या फिर वैसे मामले शामिल नहीं है जिनकी रिपोर्ट थाने में दर्ज नहीं हुई हो.

केवल आंकड़ों के आधार पर ही पुलिस को संतुष्ट होने की जरूरत नहीं है. बीते दिनों बीए की छात्रा मंजू की निर्मम हत्या से जनता में व्यापक आक्रोश है. लोग जनप्रतिनिधियों पुलिस को दबी जुबान खरी-खोटी सुना रहे हैं. मंजू हत्याकांड का पर्दा उठाना कानून व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है.

© SITAMARHI LIVE | TEAM.



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