सात घंटे ऑपरेशन कर डॉ. वरुण ने बचाई पंकज की जान

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सात घंटे लंबे ऑपरेशन व पत्रकार, चिकित्सक और छात्र संगठन एबीवीपी के युवाओं द्वारा दिए गए ए पॉजिटिव ब्लड के बाद चिकित्सक डॉ. वरुण कुमार ने सुप्पी प्रखंड के राजपुर निवासी पंकज कुमार सिंह के जिस्म से सोलह गोलियां निकाली। चिकित्सक के प्रयास का ही नतीजा है कि इतनी गोली लगने के बाद भी उसकी जान बचा ली गई।

जिले के चिकित्सा सेवा क्षेत्र में अब तक का यह पहला मामला है। वैसे अभी जख्मी युवक की जिदगी से खतरे के बादल छंटे नहीं है। लेकिन, डॉ. वरुण के इस पहल की सर्वत्र सराहना हो रही है। बताते चलें कि सुप्पी प्रखंड के राजपुर गांव में शनिवार की रात बदमाशों ने पंकज पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई। बदमाशों ने नाईन एमएम के पिस्टल से फायरिग करते हुए दो मैगजीन खाली कर दिए। इनमें दो गोली मिसफायर हो गई। जबकि 16 गोली पंकज के पेट, आंत, फेफड़ा, लीवी, कीडनी में घुस गई। आधी रात परिजन उसे लेकर शहर के रिग बांध स्थित नंदीपत अस्पताल पहुंचे।



डॉ. वरुण कुमार ने उसे भर्ती तो कर लिया, लेकिन उसका ब्लड ग्रुप ए पॉजिटिव देख वे सन्न रह गए। वजह उनके अस्पताल में ए पॉजिटिव ब्लड नहीं था। इसी बीच समाचार संकलन करने पहुंचे एक पत्रकार को डॉ. वरुण ने इसकी जानकारी दी। पत्रकार हिमांशु शेखर का ब्लड ग्रुप भी ए पॉजिटिव था, लिहाजा उन्होंने अपना एक यूनिट खून दिया। इस खून से डॉक्टर ने ऑपरेशन शुरू किया।

इधर, डॉ. वरुण की पत्नी डॉ. श्वेता ने एचएमटी हॉस्पीटल के डॉ. साजिद अली को फोन कर मदद मांगी। उनके अस्पताल में भी इस ग्रुप का खून नहीं था, लेकिन डॉ. साजिद अली का ब्लड ग्रुप ए पॉजिटिव था। डॉक्टर साजिद ने आधी रात गाड़ी निकाली और मानवता का परिचय देते हुए नंदीपत अस्पताल में पहुंच कर खुद अपना खून दिए। वहीं अपने अस्पताल के दो कर्मियों को बुलाकर भी खून दिलवाए। इसके बाद पत्रकार हिमांशु शेखर ने युवाओं को कॉल करना शुरू किया। जबकि, डॉ. वरुण कुमार ने भी कुछ लोगों को कॉल कर ए पॉजिटिव ब्लड की मांग की।


इसके बाद छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सौरभ भारद्वाज, अभय सिंह, अविनाश कुमार और विक्रम भारद्वाज ने अस्पताल पहुंच कर रक्तदान किया। आठ यूनिट ब्लड मिलने के बाद चिकित्सक ने सात घंटे तक ऑपरेशन कर पंकज सिंह के जिस्म से 16 गोलियां निकाली। तब उसकी जान बची। उसे आइसीयू ने रखा गया है। हालांकि, फेफड़े से खून निकलना जारी है। जब तक खून रूक नहीं जाता है तब तक उसकी जिदगी खतरे में है।

Sources : Dainik Jagran.




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