रीगा चीनी मिल प्रबंधन और मजदूरों के बीच झड़प, दर्जनभर मजदूर जख्मी |

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रीगा में मांगों को लेकर मिल प्रबंधन और मजदूर यूनियन के बीच जारी टकराव बुधवार को हिसक झड़प में बदल गया। मंगलवार की आधी रात से बेमियादी हड़ताल पर गए मजदूरों की मिल प्रबंधन से भिड़ंत हो गई।

झड़प में एक दर्जन मजदूर जख्मी हो गए। इनमें पांच की हालत गंभीर बनी हुई है। जख्मी शंभू राउत, इंद्रजीत राय, भजू महतो, कामेश्वर पासवान और मोहन महतो को इलाज के लिए स्थानीय पीएचसी में भर्ती कराया गया है। मजदूरों ने मिल पर जम कर रोड़ेबाजी की। इसके बाद अफरातफरी मच गई। मिल के अधिकारियों ने भाग कर अपनी जान बचाई। थानाध्यक्ष सुभाष मुखिया के नेतृत्व में पुलिस लाठीचार्ज कर स्थिति संभाली। इधर, हड़ताल के चलते किसानों का सैकड़ों ट्रैक्टर गन्ना यार्ड में खड़ा रहा, लिहाजा किसानों ने भी जम कर हंगामा किया। घटना के बाद बीडीओ नीतू प्रयदर्शिनी, सीओ राम उरांव और थानाध्यक्ष सुभाष मुखिया ने सशस्त्र बल के साथ मौके पर पहुंच कर स्थिति संभाली।


एहतियात के दौर पर मिल के चप्पे-चप्पे पर सशस्त्र बल तैनात कर दिया गया है। टकराव की स्थिति बरकरार है। मजदूरों ने मिल प्रबंधन पर बाहर से आदमी बुलवा कर हमला कराने का आरोप लगाया है। हालांकि, इस बाबत मिल प्रबंधन का कोई बयान नहीं आया है। लेकिन, मिल प्रबंधन ने कार्रवाई करते हुए मिल के एचआर मैनेजर को पद से हटा दिया है। वहीं हड़ताल के मद्देनजर जिला प्रशासन से पहल करने की मांग की है। साथ ही मिल की स्थिति से अवगत करा दिया है। जबकि वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष रामनंदन ठाकुर ने बताया कि कार्य स्थलों पर जहां जरूरी मशीन चल रही हैं वहां कर्मचारी ड्यूटी पर तैनात हैं ताकि कच्चा रस तथा बॉयलर को नुकसान नहीं हो। इसी बीच ईखोत्पादक संघ के अध्यक्ष नागेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा है कि इस वक्त मिल में हड़ताल होना किसानों के लिए घातक है। उन्होंने मिल प्रबंधन से कर्मचारियों के साथ बैठक कर समस्या का निदान कराने की अपील की है।

इसी बीच चीनी मिल बंद होने की खबर के बाद श्रम अधीक्षक मनीष कुमार व एसडीओ सदर मुकुल कुमार गुप्ता समेत अधिकारियों ने वर्कर्स यूनियन के महामंत्री मनोज कुमार समेत अन्य से देर शाम वार्ता शुरू की। समाचार लिखे जाने तक वार्ता जारी थी। बताया गया है कि मांगों को लेकर मिल प्रबंधन और मजदूरों के बीच लंबे समय से टकराव की स्थिति है। मजदूरों के आंदोलन की सूचना के बाद डीएम डॉ. रणजीत कुमार सिंह ने दो बार मिल का दौरा कर टकराव को समाप्त करते हुए मिल प्रबंधन को 15 मार्च तक बोनस भुगतान का आदेश दिया था।


वर्कर्स यूनियन को मान्यता देने को मिल प्रबंधन तैयार नहीं

रीगा चीनी मिल के कर्मचारियों की हड़ताल के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई है, कर्मचारी यूनियन कार्यालय में बैठक कर जहां आगे की रणनीति तय करने में लगे हैं, वहीं मिल प्रबंधन के सभी अधिकारी चीनी मिल के गेस्ट हाउस में बैठक कर मजदूरों की हड़ताल से निबटने के उपाय तलाश रहे हैं। मिल प्रबंधन किसी भी हालत में वर्कर्स यूनियन को मान्यता देने को तैयार नहीं हो रहा है। चीनी मिल के अध्यक्ष अमर शर्मा ने बताया कि वर्कर्स यूनियन का रजिस्ट्रेशन नहीं है। उन्होंने कहा कि पूर्व में प्रबंधन इसी यूनियन से वार्ता करती रही है तथा विभिन्न मुद्दों पर समझौता करती रही है जो गलत था। दूसरी तरफ यूनियन के अध्यक्ष रामनंदन ठाकुर तथा महामंत्री मनोज कुमार ने बताया कि जब से चीनी मिल है यही यूनियन है, प्रबंधन ने गलत तरीके से एक दूसरा यूनियन खड़ा कर दिया है, लेकिन उसमें श्रमिक नहीं हैं। मजदूरों का नए संगठन पर विश्वास नहीं है, जिसके चलते श्रमिक हड़ताल पर चले गए हैं।

मिल प्रबंधन जिला प्रशासन को भी गलत जानकारी देकर मजदूरों का दोष साबित करने में लगी है। साथ ही मजदूर नेताओं को जेल भेजने की धमकी दे रही है। बताया कि इन हालातों में समस्या का समाधान मुश्किल हो रहा है। मिल मालिक हत्या के आरोपी हैं। दबंग हैं, उन्होंने मजदूरों को डराने के लिए दूसरे जगहों से कर्मचारी के रूप में अपराधियों को बुला रखा है। इसके चलते सभी मजदूर भयभीत हैं। उधर, चीनी मिल के चेयरमैन ने फोन पर बताया कि मजदूरों को हड़ताल तोड़ कर काम पर आ जाना चाहिए.

Sources:- Dainik Jagran | Team



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