मां सीता की कृपा से मिलता श्री राम कथा सुनने का सौभाग्य

0

पुनौराधाम मंदिर में हो रहे श्री रामकथा के चौथे दिन विद्वान संत कथावाचक गोविद भाई ने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि राम कथा में वही आते हैं जिनपर मां सीता की कृपा होती है बल्कि जिनको मां से अनुमति मिलती है।

उन्होंने कहा कि राम कथा में आने से लाभ ही लाभ है। कथा में गाने, रोने, सोने सब का सुफल है। कथा वाचक गोविद भाई ने चौथे दिन शुक्रवार को कथा में महाराज दशरथ का परिवार और अयोध्या नगरी के भाग्य का प्रसंग सुनाया। इस दौरान कथा में वात्सल्य रस की धारा बहती रही जिसमें भगवान शिव एवं भक्त काकभुशुंडि का वर्णन सुन श्रद्धालु भक्ति से सराबोर होते रहे।


उन्होंने कहा कि सो सुखधाम राम अस नामा। अखिल लोक दायक विश्रामा। गुरु वशिष्ठ ने दशरथ के चारों पुत्रों का नामाकरण किया। बड़े पुत्र कौशल्या नंदन का नाम राम रखा गया। यह राम का संस्कार था कि प्रात: काल उठिकै रघुनाथा। मातु पिता गुरु नावहि माथा। राम धीरे-धीरे किशोर हो रहें हैं तभी दशरथ दरबार में महामुनि विश्वामित्र का आना होता है, क्योंकि विश्वामित्र के यज्ञ में राक्षस विघ्न डालने रहे थे।

आगे उन्होंने कहा कि राक्षस से निजात पाने के लिए मुनि को राम का ध्यान आया। बहुत समझाने के बाद दशरथ राम लक्ष्मण को मुनि के साथ जाने की अनुमति देते हैं। राम द्वारा ताड़का सहित अन्य राक्षसों का वध होता है और यज्ञ की रक्षा होती है। फिर मुनि के साथ राम लक्ष्मण का जनकपुर प्रस्थान होता है। बीच में अहिल्या उद्धार होता है। गंगा का वर्णन आता है। कथा जनकपुर पहुंच कर विश्राम लेती है।


Input : Dainik Jagran.



Comment Box