मंगलाधाम मंदिर में छह दिवसीय सीता जन्मोत्सव का समापन

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ज़िले के बाजपट्टी प्रखंड के मंगलाधाम मंदिर में शनिवार की रात्रि छह दिवसीय जारी सीता जन्मोत्सव का समापन विशेष महाआरती किया गया.

इस दौरान मंगलाधाम परिवार की ओर से मन्दिर की चहुओर 108 घी के दिये से जगमग जगमग करता रहा। इस दौरान भक्तो की भीड़ भी सन्ध्या बेला की आरती में उमड़ पड़ी थी।भक्तो ने सीता बिराजथि मिथिलाधाम सब मिलिकय करियनु आरती। संगहि सुशोभित लछुमन-राम सब मिलिकय करियनु आरती आदि से मन्दिर गुंजयमान होता रहा जबकि भक्तो ने मनवांछित फल की प्राप्ति को लेकर 51 नारियल का बलि भी चढ़ाया गया।


आरती के अंत में जय जय श्री राम की जयकारा भी लगा रहे थे।वही छठि के दिन माता सीता के लिए अनेको व्यंजनों का भोग लगाया गया। गौरतलब हो कि मंगलाधाम मंदिर में भी सीता जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया था जहाँ भक्तों ने फूलो की बारिश कर बधाई व सोहर पर भी झूमने पर मजबूर हो गए थे। आचार्य कृष्ण कुमार झा ने बताया कि सीता जन्मोत्सव के दौरान सभी देवी देवताओं का विशेष पूजा अर्चना की गई। भक्तो की उमड़ी भीड़ से मन्दिर गुंज्यमान हो गया। इस दौरान मन्दिर को भी फूलो से सजाया गया था।



भक्तों की उमड़ी भीड़ ने मिथिला में बाजत बधाइयाँ प्रकट भयो हैं सीता मईया आदि कई बधइयाँ व सोहर भी गा रहे थे।आचार्य ने बताया कि वैशाख के शुक्ल पक्ष की नवमी के दिन, पुष्य नक्षत्र में मिथिला नरेश राजा जनक ने संतान की कामना से हवन आयोजित किया था। इसके बाद वह हल से भूमि जोत रहे थे, तभी उनका हल धरती में किसी चीज से टकराकर फंस गया, काफी मेहनत के बाद भी हल नहीं निकला। आखिरकार भूमि से मिट्टी हटाई गई, नीचे एक संदूक में बच्ची मिली। राजा जनक को कोई संतान नहीं था, इसलिए वे बच्ची को अपनी बेटी मान उसका नाम सीता रखा। महाआरती के बाद महाप्रसाद का वितरण किया गया.

Report : Shyam Gopal | Team.


© Sitamarhi LIVE | Team.



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