बाजार में आम के नाम बिक रहा मीठा जहर

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भीषण गर्मी के बीच गांव से शहर तक के बाजार आम से गुलजार हैं। जगह-जगह पीले-पीले पके आम लोगों को आकर्षित भी कर रहे हैं। लोग खरीद भी रहे हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि यह आम नहीं बल्कि मीठा जहर है। केमिकल युक्त ये आम लोगों को बीमार कर रहा है। इसके चलते पेट संबंधी रोगों का प्रसार हो रहा है। पेट दर्द, मिचली, गैस, बदहजमी और डायरिया जैसे रोगों का कारण यह आम बन रहा है।

दुकानदार लोगों को भागलपुर का मालदह आम बता कर न केवल जेब में चपत लगा रहे है बल्कि, सेहत भी खतरे में डाल रहे हैं। सीतामढ़ी में सौ रुपये में डेढ़ किलो बिकने वाला यह आम पटना के रास्ते अन्य फलों के साथ पहुंच रहा है। प्रत्येक आम पर स्टीकर लगा है। स्टीकर पर बेस्ट क्वालिटी लिखा है। कुछ आम सामान्य से ज्यादा पीला दिखता है। हालांकि, इसका स्वाद अच्छा नहीं है। शहर के आम विक्रेता मंसूरी आलम बताते हैं कि हम फल के विक्रेता हैं। जिस मौसम में जो फल आता है उसे बेचते हैं। अभी पटना की मंडियों से आम लाया जा रहा है।


इनमें अधिकांश आम भागलपुर और कोलकाता का है। कुछ आम चेन्नई से भी आ रहा है। फल विक्रेता जितेश के अनुसार सीतामढ़ी के बाजार में बंगाल की हेमसागर नामक आम की प्रजाति बिक रही है। बताया कि कार्बाईड से आम के पका कर ही बाजारों में भेजा जाता है। डुमरा के फल विक्रेता अजीज ने बताया कि सीतामढ़ी समेत बिहार के इलाके में सबसे पहले जर्दालु आम आता है। मालदह और बंबईया आम जून में आता है। हर साल इस मौसम में बंगाल से ही आम लाया जाता है।

अजीज ने स्वीकार किया कि सारे आम कार्बाइड से पकाए हुए होते हैं। बताया कि बंगाल से ही आम को पका दिखाने के लिए पीले रंग से कलर दिया जाता है। स्थानीय स्तर पर आम को कार्बाइड से पकाने या रंगने का कम नहीं होता है। यहां के फल विक्रेता केला, सेब, नारंगी और बेदाना की तरह ही आम खरीद कर स्थानीय बाजारों में बेचते हैं। डुमरा के फल विक्रेता नईम बताते हैं कि बंगाल का आम बाजार में उपलब्ध जरूर है, लेकिन खरीदार नहीं मिल रहे। पहले दिन 100 रुपये प्रति किलो बिकने वाला आम अब सौ रुपये में डेढ़ से दो किलो बिक रहा है। बताया कि बाहरी आम का स्वाद ठीक नहीं है।


Sitamarhi LIVE | TEAM.



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