प्यार और भाईचारे का बेमिसाल पैगाम : यहां मंदिर में अजान और मस्जिद में गूंजता है राम-राम

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प्यार और भाईचारे का बेमिसाल पैगाम : यहां मंदिर में अजान और मस्जिद में गूंजता है राम-राम

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मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना। यह पंक्ति मालेरकोटला की सैमसन कॉलोनी पर सटीक बैठती है। इस कॉलोनी में मस्जिद और मंदिर साथ-साथ बने हैं और यह दोनों धार्मिक स्थल यहां सांप्रदायिक भाईचारे की मिसाल भी बने हुए हैं। मंदिर से आरती की धुन मस्जिद में तो मस्जिद से अजान की आवाज मंदिर में गूंजती है। हर सुबह मस्जिद के मौलवी मोहम्मद सबीर मंदिर के पंडित चेतन शर्मा को राम-राम पंडित जी के मधुर शब्दों से पुकारते हुए उनका मंदिर में पहुंचने पर स्वागत करते हैं। पंडित चेतन शर्मा भी जवाब में मौलवी जी से ‘राम-राम मौलवी साहिब, खैरियत है’ कहकर कुशलक्षेम पूछते हैं। मौलवी भी हल्की मुस्कुराहट से जवाब देते हैं ‘अल्लाह की मेहर’ है।

मंदिर व मस्जिद के बीच मात्र नौ ईंच की दीवार
मंदिर व मस्जिद के बीच मात्र नौ ईंच की दीवार का ही फासला है। मंदिर में मौजूद शिवलिंग पर जहां रोजाना मस्जिद में उगे बेल के विशाल पेड़ के बेलपत्र चढ़ाए जाते हैं। वहीं, रमजान माह के दौरान रोजा इफ्तारी के लिए मुस्लिम भाइयों को फल व खजूर इत्यादि मंदिर की तरफ से भेंट किए जाते हैं। दशहरा-दीवाली हो या ईद, यहां पर हर त्योहार मिलजुल कर मनाया जाता है। मंदिर से मस्जिद में ईद पर फल और मिठाइयां भेंट की जाती हैं।



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