ढाई लाख से भी अधिक वोटों से जीते सुनील कुमार पिंटू

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सीतामढ़ी संसदीय सीट से एनडीए समर्थित जदयू प्रत्याशी सुनील कुमार पिटू ने ढाई लाख से अधिक वोटों से जीत कर जहां इस सीट से सबसे अधिक मतों के अंतर से जीत दर्ज की है, वहीं सर्वाधिक मत प्राप्त करने का भी रिकॉर्ड बनाया है। जबकि पिटू की जीत से इस सीट पर एनडीए का दबदबा बरकरार रहा है।

पिटू ने कुल 5,67,745 मत प्राप्त किया है, यह सीतामढ़ी संसदीय सीट से किसी भी प्रत्याशी द्वारा प्राप्त करने वाला सर्वाधिक मत है। वहीं जीत का अंतर 2,50,539 मत भी रिकॉर्ड बन गया है। पिटू के विधायक से मंत्री और फिर अब सांसद बनने की कहानी सिनेमाई कहानी से कम नहीं है। पिटू के इस जीत के पीछे स्वामी राम भद्राचार्य का आशीर्वाद भी माना जा रहा है। स्वामी रामभद्राचार्य ने वर्ष 2017 में पुनौरा धाम में पहुंचे तत्कालीन राज्यपाल रामनाथ कोविद को राष्ट्रपति बनने का आशीर्वाद दिया था। कुछ माह बाद रामनाथ कोविद राष्ट्रपति चुने गए। जबकि पिछले साल आए राज्यपाल सत्यपाल मल्लिक को स्वामी रामभद्राचार्य ने बताया था कि किस तरह वह सीतामढ़ी आए थे। उनके कहने पर ही पिटू ने यहां भवन बनाया था, जिसमें राम कथा का आयोजन हो रहा है। उन्होंने कहा था कि मेरी इच्छा है कि पिटू सांसद बने और केंद्र में मंत्री बने। एक साल बाद ही स्वामी रामभद्राचार्य का कहा गया शब्द सही साबित हुआ है।


शहर के ओल्ड एक्सचेंज रोड निवासी सुनील कुमार पिटू चार बार लगातार सीतामढ़ी सीट से विधायक रहने के बाद साल 2015 का विस चुनाव हार गए थे। लोकसभा चुनाव के लिए एनडीए के घटक दलों में हुए समझौते के चलते यह सीट जदयू को चली गई थी। टिकट के लिए लोगों की लंबी कतार थी, इनमें पिटू का नाम नहीं था, वजह पिटू भाजपा में थे। जदयू ने डॉ. वरुण कुमार को टिकट दिया। गैर राजनीतिक व्यक्ति को टिकट दिए जाने का विरोध होने लगा। अंतिम समय में पार्टी ने सीतामढ़ी से प्रत्याशी बदल दिया। यह महज संयोग ही था कि पिटू जदयू के प्रत्याशी बना दिए गए। खुद इसका अनुमान पिटू को भी नहीं था। डिप्टी सीएम ने सीएम से बात की। पिटू को पटना बुलाया गया। जहां उन्हें जदयू की टिकट थामा दी गई।

शुरुआती दिनों में सीएम के फैसले पर सवाल उठे लेकिन सीएम, डिप्टी सीएम, रामविलास पासवान और अमित साह के दौरे के बाद तस्वीर बदली। लोगों ने राष्ट्र की सुरक्षा और पीएम मोदी के नाम पर रिकॉर्ड मतदान किया। यही वजह है कि सुनील कुमार पिटू सीतामढ़ी के सांसद चुने गए।


सुनील कुमार पिटू (58) कॉमर्स स्नातक हैं। उन्होंने वर्ष 1977 में एसएलके हाईस्कूल से मैट्रिक, वर्ष 1980 में गोयनका कॉलेज से इंटर और वर्ष 1980 में गोयनका कॉलेज से ही स्नातक की है। परिवार में पत्नी और दो बच्चे है। पिटू के दादा किशोरी प्रसाद और पिता हरि शंकर प्रसाद सीतामढ़ी सीट से दो-दो बार विधायक रह चुके हैं। विधायक पिता हरि शंकर प्रसाद के निधन से रिक्त हुए सीट पर वर्ष 2003 में हुए उप चुनाव में पिटू ने शाहिद अली खान को शिकस्त देकर राजनीति में इंट्री ली। इसके बाद साल 2005 के फरवरी व अक्टूबर, साल 2010 में पिटू ने लगातार जीत दर्ज की। वर्ष 2015 में राजद के सुनील कुमार कुशवाहा ने पिटू को शिकस्त दे दी। 27 नवंबर 2010 को पिटू को पर्यटन मंत्री बनाया गया था।

पिन्टू की जीत से इस बार रिकॉर्ड बना है। पिछले लोक सभा चुनाव में एनडीए समर्थित रालोसपा प्रत्याशी राम कुमार शर्मा ने 4,11,265 मत मिले थे। जबकि इस सीट पर सर्वाधिक मत प्राप्त कर सबसे ज्यादा अंतर से जीत का रिकॉर्ड वर्ष 1991 में जनता दल प्रत्याशी नवल किशोर राय का था। नवल किशोर राय को तब कुल 4,25,186 मत मिले थे। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी रामवृक्ष चौधरी को 2,29,151 मत के अंतर से हराया था। चौधरी को कुल 1,96,035 मत मिले थे। पिन्टू ने नवल किशोर राय द्वारा बनाए गए रिकॉर्ड को अपने नाम कर लिया है।

Sources : Dainik Jagran | Team.



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