अब नहीं खुलेगा रीगा चीनी मिल ! सरकार ने दूसरे मिल को सीतामढ़ी के किसानों से गन्ना खरीदने की दी इजाज़त

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सीतामढ़ी के रीगा स्थित चीनी मिल का पेराई सत्र अब तक शुरू नहीं हो सका है. सामान्यतः यह नवंबर महीने में शुरू हो जाता है. इस कारण सीतामढ़ी में गन्ना उत्पादक किसानों के लिए हाहाकार की स्थिति पैदा हो गई है. जिले में 100 करोड़ का गन्ना किसानों के खेतों में खड़ा सूख रहा है.

बिहार सरकार के गन्ना उद्योग विभाग ने बुधवार को कार्यालय आदेश जारी किया है इसमें बताया गया है कि शुगर कंपनी लिमिटेड द्वारा पेराई (सत्र 2020-21) का परिचालन अब तक प्रारंभ नहीं किया गया है. इस कारण रीगा चीनी मिल के आरक्षित ग्राम के कृषकों के खन्ना की सामयिक खपत की समस्या उत्पन्न हो गई है.


सरकार ने बताया है कि रीगा चीनी मिल के आरक्षित क्षेत्र में लगभग 15 लाख क्विंटल गन्ना उपलब्ध है. जिसकी उठाव नहीं होने पर उक्त क्षेत्र के सभी गन्ना किसानों को आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ेगा. ऐसी स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने तीन बैठक आयोजित की जिसमें रीगा चीनी मिल, सिधवलिया चीनी मिल, विष्णु चीनी मिल, मझौलिया चीनी मिल के प्रतिनिधि, सचिव एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे.

सरकार के पत्र में लिखा गया है कि उक्त बैठकों में रीगा चीनी मिल के प्रबंधन द्वारा रीगा चीनी मिल के परिचालन के संबंध में स्पष्ट सूचना नहीं दी गई. ऐसी स्थिति में सरकार ने गन्ना किसानों को के हित को देखते हुए अगले आदेश तक सीतामढ़ी के गन्ना उत्पाद को तीन अलग-अलग चीनी मिलों गोपालगंज के विष्णु शुगर मिल, मगध शुगर एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड सिंधवलिया और मझौलिया शुगर इंडस्ट्री प्रा. लि. को खरीदने की इजाजत दी है.

सीतामढ़ी के रीगा मील प्रबंधन लगातार सरकार से आर्थिक मदद पहुंचाने के लिए गुहार लगा रहा था लेकिन चीनी मिल को सरकार मदद करने को तैयार नहीं है. इतना ही रीगा चीनी मिल में 700 कर्मचारियों की रोजी-रोटी भी चलती है, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण चीनी मिल प्रबंधन ने उन्हें भी तकरीबन 6 माह पहले बाहर का रास्ता दिखला दिया था.

© SITAMARHI LIVE | TEAM.



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