क्या 25 साल पहले आकाश के पिता कैलाश विजयवर्गीय ने भी किसी को जूते से मारा था?

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कैलाश विजयवर्गीय अपने बयानों के लिए अक्सर सुर्खियों में रहे हैं. उनके बयान अक्सर हेडलाइन्स बना जाते हैं. लेकिन इस बार हेडलाइन बनाने का काम उनकी 25 साल पुरानी तस्वीर ने किया है. 26 जून के दिन उनके विधायक बेटे आकाश विजयवर्गीय का नगर निगम के अधिकारी के साथ विवाद हो गया. वो गंजी कंपाउंड के पुराने मकान गिराने आए हुए थे. लेकिन आकाश ने अधिकारी धीरेंद्र बायस पर बल्ला चला दिया.
इस घटना के बाद आकाश जेल तो चले गए लेकिन लोग उनके पिता कैलाश विजयवर्गीय की पुरानी तस्वीर ढूंढ लाए. जिसमें वो किसी अधिकारी पर जूता ताने हुए दिख रहे हैं. इस तस्वीर को लोग सोशल मीडिया पर जमकर शेयर कर रहे हैं. अलग-अलग कैप्शन के साथ.

इस फोटो को मध्य प्रदेश कांग्रेस ने भी अपने ट्विटर हैंडल से शेयर किया है.


कांग्रेस के दावों के मुताबिक साल 1994 में कैलाश विजयवर्गीय ने अफसर पर जूते से वार किया था. आसान हिंदी में कांग्रेस का ट्वीट समझे तो कैलाश विजयवर्गीय ने अफसर को जूते से मारा था.

इस दावे की जानकारी जुटाने की कोशिश की. इंदौर के कई पत्रकारों से बात की. फिर जो बात निकलकर सामने आई वो हकीकत से बिल्कुल उलट थी. आजतक से जुड़े पत्रकार धर्मेंद्र कुमार शर्मा और मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हेमंत शर्मा से जब हमने बात की तो तस्वीर की पूरी कहानी सामने आ गई.


ये बात 1994 की ही है. साल 1993 में कैलाश विजयवर्गीय दूसरी बार इंदौर से विधायक बने थे. उस दौरान इनके इलाके में पानी की भीषण समस्या चल रही थी. इलाके के लोग काफी हो-हल्ला मचा रहे थे. पानी के साथ दूसरी और भी समस्याएं थी जिसपर नगर निगम ध्यान नहीं दे रहा था.

लोगों की समस्याओं के साथ कैलाश विजयवर्गीय कमिश्नर के घर एमजी रोड विरोध प्रदर्शन करने पहुंचे. उनके साथ काफी लोगों की भीड़ भी थी. विरोध प्रदर्शन की जानकारी उस वक्त के एएसपी प्रमोद श्रीपाद फलनीकर को लगी. जिसके बाद वो भी मौके पर दल-बल के साथ पहुंच गए.

भीड़ के साथ पहुंचे कैलाश उस वक्त के कमिश्नर से मिलना चाहते थे. लेकिन ज्यादा भीड़ होने की वजह से उन्हें मिलने नहीं दिया जा रहा था. प्रमोद फलनीकर के रोकने के बावजूद वो मिलने की ज़िद पर अड़े थे. तभी बातों-बातों में उन्होंने अपना जूता निकालकर दिखाया और कहा-

मैं कई बार आ चुका हूं उनसे मिलने लेकिन मुझे मिलने नहीं दिया जा रहा है. देखिए मेरा जूता भी घिस चुका है.

तभी उस वक्त स्थानीय न्यूज़ पेपर के फोटोग्राफर संजय चौधरी ने ये फोटो खींच ली. आजतक के पत्रकार धर्मेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि संजय चौधरी का निधन हो चुका है. वर्ना इस फोटो की और जानकारी बाहर निकल कर आती.

वरिष्ठ पत्रकार हेमंत शर्मा ने बताया कि उस वक्त कोई मुकदमा दर्ज़ नहीं हुआ था. क्योंकि ऐसी कोई बात ही नहीं हुई थी. उस दौर में ये कोई बड़ी घटना नहीं थी, क्योंकि उन्होंने सिर्फ जूता दिखाया था. इस मामले में ना ही कोई शिकायत की गई थी. तो कुल मिलाकर जिस दावे के साथ कांग्रेस ने ये तस्वीर शेयर की वो सही नहीं प्रतीत होता.

INPUT:—– THE LALLANTOP



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