वैक्सीन नीति में बदलाव को अपने दबाव की कामयाबी मान रहा विपक्ष, संसद का विशेष सत्र बुलाने की भी की मांग

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सभी नागरिकों को मुफ्त कोरोना टीका लगाने के प्रधानमंत्री के एलान को विपक्षी दल सुप्रीम कोर्ट और अपने सियासी दबाव की पहली कामयाबी मान रहे हैं और अब तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ भी वे इसी रणनीति पर चलेंगे। विपक्षी दलों का मानना है कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर के कहर और किसानों का आंदोलन छह महीने से अधिक लंबा खींच जाने के बाद देर-सबेर सरकार को कृषि कानूनों पर भी लचीला रुख अपनाना पड़ेगा। इस बीच कांग्रेस ने सभी को मुफ्त वैक्सीन देने की घोषणा के बाद भी निजी अस्पतालों में इसके लिए शुल्क के प्रावधान पर सवाल उठाते हुए सरकार से संसद में टीकाकरण का रोडमैप स्पष्ट करने की मांग की है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री की घोषणाओं को लेकर अपनी प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि पार्टी के शीर्षस्थ नेताओं की बार-बार सभी लोगों का मुफ्त टीकाकरण की उठाई गई आवाज ने सरकार को अपनी वैक्सीन नीति में बदलाव करने को बाध्य किया है। इस क्रम में उन्होंने पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की तरफ से प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्रों का हवाला भी दिया। जयराम ने कहा कि विपक्ष के 12 बड़े नेताओं के संयुक्त पत्र में भी यही बात कही गई थी और आखिरकार सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद सरकार कुंभकर्णी नींद से जागी और प्रधानमंत्री को वैक्सीन नीति में बदलाव की घोषणा करनी पड़ी। कांग्रेस समेत कुछ अन्य दलों के वरिष्ठ नेताओं ने अनौपचारिक बातचीत में कहा कि कृषि कानूनों की खिलाफत में भी विपक्ष इसी रणनीति पर चलेगा।


निजी अस्पतालों में वैक्सीन के लिए शुल्क तय किए जाने के फैसले पर सवाल उठाते हुए जयराम ने कहा कि यह सरकार टीकाकरण की डेडलाइन के पीछे नहीं बल्कि हेडलाइन के पीछे भाग रही है। उन्होंने कहा कि सभी जगह मुफ्त वैक्सीन लगाई जानी चाहिए और को-विन एप पर पंजीकरण की अनिवार्यता भी खत्म की जाना चाहिए क्योंकि करोड़ो लोगों, विशेषकर ग्रामीणों को डिजिटल प्लेटफार्म सुलभ नहीं है।

कांग्रेस नेता ने सरकार की घोषणा के बाद टीकाकरण की नीति पर संसद में चर्चा कराए जाने की जरूरत बताते हुए विशेष सत्र बुलाने की मांग की और कहा कि इसके लिए आवश्यक बजट तय करना होगा। वैक्सीन के लिए बजट में 35,000 करोड़ रुपये का प्रावधान है और नए एलान के बाद 50,000 करोड़ रुपये की जरूरत का अनुमान है। ऐसे में संसद में वैक्सीन नीति और बजट पर चर्चा अपरिहार्य है।

वैक्सीन वितरण में किसी तरह का भेदभाव नहीं किए जाने की बात उठाते हुए जयराम ने कहा कि भाजपा शासित राज्यों को टीका उपलब्ध कराने में तवज्जो दिए जाने का उदाहरण देखा गया है। इसलिए सरकार को सहकारी संघवाद का अनुसरण करते हुए राज्यों को पक्षपात किए बिना टीका मुहैया कराना चाहिए ताकि इस साल दिसंबर तक सभी को वैक्सीन लगाने का लक्ष्य हासिल किया जा सके।



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