लाल किले की पुलिस बैरक में डरे सहमे बैठे रहे बच्चे और कलाकार, जानिए कैसे छिप कर बचाई जान

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नई दिल्ली,  राजपथ पर गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल होना कलाकारों और छात्रों के लिए गौरव का लम्हा होता है, लेकिन इस बार बाल कलाकारों के लिए परेड का समापन डरावना रहा। विभिन्न झांकियों में शामिल करीब 50 बच्चे और 100 युवा व वरिष्ठ कलाकारों के लिए लाल किला परिसर में उपद्रवियों की हिंसा किसी आतंकी घटना से कम नहीं थी। बाहर हिंसा हो रही थी तो अंदर पुलिस बैरक में तकरीबन सात घंटे तक ये बच्चे जान बचाकर भूखे-प्यासे छिपे रहे। इनमें से कई का तो रो रोकर बुरा हाल था। पुलिस वाले इन्हें किसी प्रकार मनाने की कोशिश में जुटे रहे। कलाकारों को लग रहा था कि जैसे कोई आतंकी हमला हो गया है। इसलिए उन्हें छिपाकर ले जाया जा रहा है।

बता दें कि करीब 12:30 बजे सारी झांकियां राजपथ और पुरानी दिल्ली से होते हुए लाल किला परिसर में पहुंचीं। यहां बच्चों को जलपान देने का कार्य हो ही रहा था कि अचानक पुलिस को उपद्रवियों के लाल किला पहुंचने की सूचना मिली। आनन फानन में सभी कलाकारों को लाल किला की पुलिस अपने बैरक में लेकर पहुंच गई। इसके साथ ही बड़ी संख्या में बैरक में पुलिस की तैनाती कर दी गई। हालांकि उपद्रवियों इस ओर नहीं आए, लेकिन बाहर भीड़ का शोर इन्हें दहशत में डाले हुए था। जैसे-जैसे पुलिस बल की संख्या लाल किला परिसर में पहुंची तो प्राचीर को खाली कराया। इसके बाद तकरीबन शाम सात बजे इन बच्चों को बैरक से बाहर निकाला गया।


लाल किला परिसर में जब उपद्रवियों की संख्या कम हो गई तो शाम को सुरक्षा के पूरे बंदोबस्त के साथ बाल कलाकारों समेत सभी को दरियागंज स्थित पुलिस मेस ले जाया गया। यहां पर पुलिस अधिकारियों द्वारा इनका मनोबल बढ़ाया गया। यहां पर उन्हें खाना खिलाकर फिर सुरक्षित तरीके से दिल्ली कैंट स्थित राष्ट्रीय रंगशाला शिविर में भेजा गया।

झांकियों के साथ चलने वाले कलाकार इंडिया गेट रुक गए थे। वहीं, झांकियों पर सवार कलाकार झांकियों के साथ ही लाल किला चले गए थे। एक कलाकार ने बताया कि हम जैसे ही झांकियों से उतरे तो शोर सुनाई देने लगा। इस पर पुलिस हमें एक साथ लाल किले के अंदर ले गई। यहां हमें दूसरी मंजिल पर एक हॉल में रखा गया था। इस वर्ष राजपथ में हुई परेड में 32 झांकियां थीं। इसमें 300 कलाकार विभिन्न प्रदेशों के थे।



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