मोदी 5 साल में एक ही बार कराना चाहते हैं सारे चुनाव,जाने क्या है One Nation One Election

0

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में NDA सरकार दोबारा सत्ता में आ चुकी है। भारी बहुमत से आये पीएम से लोगों की कई अपेक्षाएं हैं तो पीएम की अपनी कई आकांक्षाएं भी। इन्हीं आकांक्षाओं में से एक है One Nation One Election यानी एक राष्ट्र एक चुनाव। इसको लेकर चुनाव आयोग तैयार है लेकिन हमारे देश की बहुदलीय राजनीतिक प्रणाली के कारण आम राय बनाना आसान नहीं। एक राष्ट्र एक चुनाव सहित कई दूसरे मुद्दों को लेकर 19 जून को पीएम ने सर्वदलीय बैठक बुलाई है। आइए जानते हैं वह हर कुछ जो आप One Nation One Election के बारे में जानना चाहेंगे:

क्या है एक राष्ट्र एक चुनाव ?

एक राष्ट्र एक चुनाव से आशय है देश में विधानसभा और लोकसभा चुनाव एक साथ आयोजित कराने को लेकर। दरअसल 1952 से लेकर 1967 तक देश में सारे चुनाव एक साथ ही होते थे, लेकिन 1967 के बाद कई सारी सरकारें बर्खास्त की जाने लगीं। यही कारण है कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच समय का फासला बढ़ता गया।


क्या है इसके फायदे ?

एक राष्ट्र एक चुनाव को लागू करने से कई सारे फायदे हैं। देश में हर वक़्त कोई न कोई चुनाव होते रहते हैं जिस कारण मतदाताओं का मतदान के प्रति उत्साह कम हो जाता है। सारे चुनाव एक बार कराने से मतदाताओं का उत्साह बना रहेगा। इसको लागू करने से सरकारी धन, संसाधन और समय की बचत होगी। प्रशासनिक प्रयासों की पुनरावृत्ति को रोका जा सकेगा और राजनीतिक दलों के खर्च में भी कमी आएगी। चुनावों में कालाधन खपाने जैसी समस्या पर भी लगाम लगेगा। बार बार अचार संहिता नहीं लगेगी जिससे लोगों के काम प्रभावित नहीं होंगे। टीचर्स, अधिकारीयों सहित सरकारी कर्मचारियों को बार बार चुनावी ड्यूटी से मुक्ति मिलेगी। इन सब के अलावा इसे लागू करने से सरकारी मशीनरी की कार्यक्षमता भी बढ़ेगी।

लागू करने में क्या हैं बाधाएं?

एक राष्ट्र एक चुनाव को लागू करने के पीछे कई बाधाएं और परेशानियां भी हैं। इसे लागू करने के लिए संविधान में कई संसोधन करने होंगे। संविधान के अनुच्छेद 83, 85, 172 और 174 में बदलाव करना होगा। इसके अलावा अनुच्छेद 356 में भी बदलाव करना होगा। कई कानूनी अड़चनें है जिसको दूर करने के बाद ही इसे लागू किया जा सकेगा।


पक्ष और विपक्ष

कई लोगों का मानना है कि ऐसा करने से कई परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। कई लोगों का कहना है कि देश के नागरिक इतने कुशल नहीं हैं कि वह एक ही वक़्त में अलग अलग ईवीएम पर विधानसभा और लोकसभा के लिए वोट डाल सकें। अगर ऐसा होता है तो विधानसभा और लोकसभा में एक ही पार्टी जीत जायेगी। जबकि दूसरे लोगों का मानना है की एक राष्ट्र और एक चुनाव का विचार अच्छा है। प्रधानमंत्री मोदी के मुताबिक़ चुनाव होली की तरह होने चाहिए जहाँ आप चुनाव में प्रतिद्वंदियों पर रंग रूपी छींटाकशी करें और अगले चुनाव तक भूल जाएँ।



Comment Box