टीकाकरण की धीमी रफ्तार : तीन माह छोड़िए… दो साल में भी सबको टीका लगना मुश्किल

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मौजूदा हालात में औसतन सात हजार लाभार्थियों को ही रोजाना टीके लग पा रहे हैं। इनमें 18 से 44 साल की उम्र के भी लाभार्थी शामिल हैं।

हाईकोर्ट ने एक दिन पहले प्रदेश सरकार को तीन माह में टीकाकरण पूरा करने का निर्देश दिया है, लेकिन शहर में टीकाकरण की जो रफ्तार है, उसमें दो साल में भी सबको टीका लग जाए तो बड़ी बात। मौजूदा हालात में औसतन सात हजार लाभार्थियों को ही रोजाना टीके लग पा रहे हैं। इनमें 18 से 44 साल की उम्र के भी लाभार्थी शामिल हैं।


इनको घटाकर देखें तो औसत 42 सौ रोजाना का ही है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि वैक्सीन की कमी के कारण टीकाकरण की रफ्तार धीमी है। कानपुर में साढ़े 44 लाख के आसपास लाभार्थी हैं। अभी तक दो लाख 85 हजार 556 लोगों को टीके लग चुके हैं।

करीब 47 हजार लोगों को रोजाना टीके लगें, तब जाकर तीन माह में लक्ष्य को पाया जा सकता है। पूरे अभियान पर नजर दौड़ाएं तो पहली अप्रैल से अब तक कभी आठ हजार से ज्यादा लोगों ने वैक्सीन लगवाई तो कभी यह आंकड़ा पांच हजार के अंदर सिमट गया। इस लिहाज से औसतन सात हजार लोगों ने रोजाना वैक्सीन लगवाई।

अप्रैल के पहले सप्ताह का वैक्सीनेशन कवरेज औसतन साढ़े सात हजार तो मई के पहले सप्ताह का सात हजार रहा। अब तक के वैक्सीनेशन के हिसाब से देखा जाए तो साल में 20 लाख 79 हजार लोगों को ही वैक्सीन लगेगी। यह आंकड़ा साल के 297 दिनों का है। 48 दिन रविवार और 20 दिन अन्य छुट्टियां हैं।
नगर की आबादी करीब 55 लाख है। इनमें 18 साल और अधिक आयु के लगभग 44 लाख 50 हजार लाभार्थी हैं। ऐसे में इनके टीकाकरण में दो साल से भी ज्यादा समय लगेगा। बचे 11-12 लाख में बच्चे, गर्भवती महिलाएं आदि हैं, जिन्हें फिलहाल वैक्सीन नहीं लगनी है। 

लक्ष्य बढ़ाने के लिए घटा दिए वैक्सीनेशन सेंटर
स्वास्थ्य विभाग ने शहर के लिए अभी तक वैक्सीनेशन का जो लक्ष्य (औसतन रोजाना 10 हजार) रखा है, वह कभी पूरा नहीं हुआ। अधिकतम 60 से 70 फीसदी तक ही वैक्सीनेशन हुआ। यहां तक कि टीका महोत्सव में लक्ष्य 50 फीसदी ही पूरा हुआ, जबकि इसमें पूरा तामझाम स्वास्थ्य विभाग ने किया था।

अब चालबाजी से वैक्सीनेशन कवरेज प्रतिशत जरूर बढ़ा लिया गया। सेंटरों की संख्या घटा दी गई। इससे लक्ष्य भी कम हो गया। सौ लोगों में 80 ने वैक्सीन लगवा ली तो लक्ष्य 80 फीसदी पूरा बता दिया गया। अधिकतम वैक्सीनेशन सेंटरों की संख्या 143 तक पहुंची और अब घटकर 70 पर आ गई है। 

वैक्सीनेशन से ही बचाव, तब भी ढिलाई
कोरोना के स्ट्रेन ने आफत मचाई हुई है। साथ ही तीसरे म्यूटेंट का भी खतरा है। ऐसे में विशेषज्ञ बता रहे हैं कि वैक्सीनेशन से ही सुरक्षा संभव है। अगर सारे लोग वैक्सीन लगवा लें तो हर्ड इम्युनिटी का सुरक्षा कवच मिल जाएगा। इसके बाद भी ढिलाई बरती जा रही है। दो साल में तो कोरोना के कई स्ट्रेन आकर खत्म भी हो जाएंगे। 
हर सेंटर को महज सौ से 120 डोज
अभी तक जो कोरोना वैक्सीनेशन सेंटर बनाए जा रहे हैं, उन्हें औसतन सौ से 120 की डोज मिलती हैं। किसी-किसी सेंटर में बहुत जरूरत पड़ने पर अधिकतम दो सौ डोज तक दे दी जाती हैं। इसी वजह से उर्सला, जागेश्वर अस्पताल जैसे सेंटर पर जहां लाभार्थियों के अधिक संख्या में पहुंचने पर वैक्सीन नहीं लग पाती और हंगामा होता है।

वैक्सीन की कमी की वजह से वैक्सीनेशन सेंटर घटाए गए हैं। वैक्सीन की डोज अधिक मिलने लगेगी तो सेंटरों की संख्या बढ़ा दी जाएगी। वैक्सीन की उपलब्धता के हिसाब से सेंटर बनते हैं। सेंटरों के बनाने की बहुत क्षमता है।- डॉ. नेपाल सिंह, सीएमओ

एक नजर इस पर भी
– 44.5 लाख के आसपास है लाभार्थियों की संख्या
– 2.85 लाख लाभार्थियों को ही अब तक लगा टीका
– 7.5 हजार रोज का औसत था अप्रैल के पहले हफ्ते में
– 07 हजार का औसत रह गया है मई के पहले सप्ताह में
– 18 से 44 वर्ष के लाभार्थियों को घटा दें तो 42 सौ ही है मई का औसत



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