कोरोना से ठीक हो चुके लोगों को 6 महीने बाद लगे वैक्सीन, कोविशील्ड की 2nd डोज 3 महीने बाद: सरकारी पैनल का सुझाव

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देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर तमाम कोशिशों के बाद भी काबू में नहीं आ रही है। पिछले 24 घंटों की बात करें तो देश में लगभग 3 लाख 62 हजार कोरोना के मामले सामने आए हैं और लगभग 4 हजार लोगों ने कोरोना से अपनी जान गवाई हैं। कोरोना की बढ़ती रफ्तार को देखते हुए सरकार ने कुछ दिन पहले 18 साल से ऊपर के सभी लोगों को वैक्सीन लगाने की अनुमति दे दी थी। ऐसे में करोड़ों लोग वैक्सीन के लिए अपना रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं। लेकिन देश में अभी पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। ऐसे में सरकार उन समूहों की पहचान कर रही हैं, जिनका टीकाकरण कुछ दिनों या महीनों के लिए टाला जा सकता है। ऐसे में सरकारी पैनल एनटीएजीआई (The National Technical Advisory Group on Immunisation) ने कोरोना वैक्सीन को लेकर कई सुझाव दिए हैं। जिसमें कहा गया है कि कोरोना से रिकवर होने वाले लोगों को कोरोना का टीका 6 महीने बाद लगाया जाए। इसके साथ ही कोविडशील्ड की खुराकों के अंतर को बढ़ाकर 3 महीने कर दिया जाए।

कोरोना वायरस से बचाव के लिए देशभर में बड़े पैमाने पर टीकाकरण चल रहा है। ऐसे में केंद्र सरकार के राष्ट्रीय टीकाकरण तकनीकी सलाहकार समूह ने सिफारिश की है कि कोरोना वायरस से ठीक होने वाले लोगों को 6 महीने बाद कोरोना का टीका लगाया जाए। यानी जो लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए हैं, उन्हें रिकवरी के 6 महीने बाद टीका लगाया जाए। यह वह स्थिति है, जब व्यक्ति ने वैक्सीन की एक भी डोज नहीं ली हो। इस समय देश में वैक्सीन की कमी की वजह से काफी दिक्कत आ रही है, ऐसे में इससे निपटने के लिए पैनल ने यह रास्ता निकाला है।


अभी देश में कोविडशील्ड और कोवैक्सीन लगाई जा रही हैं। सरकारी पैनल एनटीएजीआई ने कहा है कि गर्भवती महिलाओं को अपनी पसंद की कोरोना वैक्सीन चुनने की आजादी मिल सकती है। गर्भवती महिलाएं बच्चे को जन्म देने के बाद कभी भी वैक्सीन लगवा सकती हैं। टीका लगाने के बाद बच्चे को दूध पिलाने से कोई नुकसान नहीं होगा। वे अपनी डिलीवरी के बाद कभी भी वैक्सीन लगवा सकती हैं।



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