1971: जब भारत के खिलाफ अमेरिका ने भेजा अपना सातवां बेड़ा

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16 दिसंबर भारत में यह दिन विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। 1971 में इसी दिन पाकिस्‍तान की सेना ने भारतीय सेना के समक्ष आत्‍मसर्पण किया था। भारत और पाकिस्‍तान की सेना के बीच यह जंग 13 दिनों तक चली थी। युद्ध की समाप्ति के बाद एक नए राष्‍ट्र बांग्‍लादेश का जन्‍म हुआ था। 1971 के ऐतिहासिक युद्ध में पूर्वी कमान के स्‍टाफ ऑफ‍िसर मेजर जनरल जेएफआर जैकब ने अहम भूमिका निभाई थी।

ऐसे में यह सवाल उठता है कि भारत ने पाकिस्‍तान के आतंरिक मामलों में क्‍यों हस्‍तक्षेप किया ? इस हस्‍तक्षेप के पीछे क्‍या थी बड़ी वजह ? उस वक्‍त विश्‍व की दो महाशक्तियों की क्‍या भूमिका थी ? इस युद्ध में अमेरिका का क्‍या स्‍टैंड था ? आइए हम आपको बताते हैं बांग्‍लादेश के उदय का पूरा सच। कैसे एक देश में धार्मिक समानता के बावजूद आर्थिक विषमता ने एक असंतोष को जन्‍म दिया।


आर्थिक विषमता के चलते स्‍वतंत्र पाकिस्‍तान में असंतोष का जन्‍म

14 अगस्त, 1947 को स्वतंत्र पाकिस्तान देश का गठन हुआ, जिसका आधार धर्म था। तत्कालीन पाकिस्तान के दो हिस्‍से थे। एक पू्र्वी पाकिस्‍तान और दूसरा पश्चिमी पाकिस्तान। पाकिस्‍तान के दोनों हिस्सों में सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक समानताएं नही थीं। संसाधनों के लिहाज से पूर्वी पाकिस्तान ज्यादा समृद्ध था, लेकिन राजनीतिक रूप से पश्चिमी पाकिस्तान ज्यादा प्रखर एवं हावी था। इस प्रकार एक ही देश के दो भागों मे पाई जाने वाली सामाजिक एवं आर्थिक विषमताएं देशव्यापी असंतोष एवं अंत मे 1971 मे बांग्लादेश के गठन का कारण बनी।

राजनीतिक उपेक्षा ने दी आजादी की हवा

पाकिस्तान के गठन के समय पूरे देश को दो हिस्‍सों में बांटा जा सकता था। एक पश्चिमी पाकिस्‍तान और दूसरा पूर्वी पाकिस्‍तान। पश्चिमी क्षेत्र में सिंधी, पठान, बलोच और मुजाहिरों की बड़ी तादाद थी, जबकि पूर्व पाकिस्‍तान में बंगाली बोलने वालों का बहुमत था। राजनीतिक चेतना के बावजूद पूर्वी पाकिस्तान राजनीतिक रूप से उपेक्षित रहा। पूर्वी हिस्से को कभी देश की सत्ता मे कभी भी उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल सका। इसके चलते पूर्वी पाकिस्तान के लोगों में जबर्दस्त नाराजगी थी।

इसी नाराजगी के कारण बांग्लादेश के नेता शेख मुजीब-उर-रहमान ने अवामी लीग का गठन किया। उन्‍होंने पाकिस्तान के अंदर ही और स्वायत्तता की मांग की। 1970 में हुए आम चुनाव में पूर्वी क्षेत्र में शेख की पार्टी ने जबर्दस्त विजय हासिल की। उनके दल ने संसद में बहुमत भी हासिल किया लेकिन प्रधानमंत्री बनाने की जगह उन्हें जेल में डाल दिया गया यहीं से पाकिस्तान के विभाजन की नींव रखी गई।

पूर्वी पाकिस्‍तान के विद्रोह में भारत ने किया हस्‍तक्षेप, पाकिस्तान को घुटने टेके

कई सालों के संघर्ष और पाकिस्तानी सेना के अत्याचार और बांग्लाभाषियों के दमन के विरोध में पूर्वी पाकिस्तान के लोग सड़कों पर उतर आए थे। 1971 के समय पाकिस्तान में जनरल याह्या खान राष्ट्रपति थे। खान ने पूर्वी हिस्से में फैली नाराजगी को दूर करने के लिए जनरल टिक्का खान को जिम्मेदारी दी। लेकिन उनके द्वारा दबाव से मामले को हल करने के प्रयास किए गए जिससे हालात पूरी तरह खराब हो गए। 25 मार्च 1971 को पाकिस्तान के इस हिस्से में सेना एवं पुलिस की अगुआई मे जबर्दस्त नरसंहार हुआ। 25 मार्च 1971 को शुरू हुए ऑपरेशन सर्च लाइट से लेकर पूरे बांग्लादेश की आजादी की लड़ाई के दौरान पूर्वी पाकिस्तान में जमकर हिंसा हुई। बांग्लादेश सरकार के मुताबिक इस दौरान करीब 30 लाख लोग मारे गए। अनगिनत महिलाओं की आबरू लूट ली गई।

शरणार्थियों की समस्‍या से आजिज आकर भारत ने उठाया ये कदम इसके चलते भारत में बांग्‍लादेश से आने वाले शरणार्थियों की समस्‍या बढ़ती जा रही थी। भारत ने अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय से पूर्वी पाकिस्तान की स्थिति सुधारने की अपील की। भारत के इस आग्रह की अनदेखी की गई। भारत में शरणार्थियों की समस्‍या का समाधान नहीं मिल रहा था। पूर्वी पाकिस्तान में अत्याचार से तंग आकर करीब 80 लाख लोग भारत की सीमा में प्रवेश कर गए थे। आजिज आकर अप्रैल 1971 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने मुक्ति वाहिनी को समर्थन देकर बांग्लादेश को आजाद कराने का फैसला किया। इसका नतीजा यह हुआ कि भारत और पाकिस्तान के बीच सीधी जंग हुई। इस लड़ाई में भारत ने पाकिस्तान को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिए। इसके साथ ही दक्षिण एशिया में एक नए देश का उदय हुआ।

1971 के दिसंबर महीने में ऑपरेशन चंगेज खान के जरिए भारत के 11 एयरबेसों पर हमला कर दिया जिसके बाद 3 दिसंबर 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध की शुरुआत हुई। महज 13 दिन के बाद पाकिस्तान की 92 हजार फौज ने सरेंडर कर दिया। पाकिस्तान आर्मी के चीफ नियाजी ने अपने बिल्ले को उतारा और प्रतीक स्वरूप अपनी रिवॉल्वर लेफ्टीनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा को सौंप दी। इसका नतीजा यह हुआ कि भारत और पाकिस्तान के बीच सीधी जंग हुई। इस लड़ाई में भारत ने पाकिस्तान को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिए। इसके साथ ही दक्षिण एशिया में एक नए देश का उदय हुआ। भारत ने 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था।

अमेरिका ने भारत के खिलाफ भेजा सातवां बेड़ा

इस लड़ाई की खास बात ये थी कि अमेरिका ने भारत के खिलाफ अपने सातवें बेड़े को उतार दिया। चीन और पाकिस्तान की शह पर पाकिस्तान पीछे हटने को तैयार नहीं था। भारत की मदद के लिए रूस आगे आया। सातवें बेड़े के पहुंचने के पहले भारत की सेनाओं ने ढाका की तीन तरफ से घेरेबंदी की और इसके साथ ही ढाका में गवर्नर हाउस पर हमला कर दिया। जिस समय भारत ने हमला किया उस वक्त गवर्रनर हाउस में पाकिस्तान के बड़े अधिकारियों की मीटिंग चल रही थी। भारतीय हमले की वजह से नियाजी घबरा गए। उन्होंने भारत को युद्ध विराम का संदेशा भिजवाया। लेकिन जनरल मानेकशॉ से साफ कर दिया कि युद्ध विराम नहीं बल्कि पाकिस्तान को सरेंडर करना होगा।



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