जब दुनिया ने ठीक से जीना नहीं सीखा था, तब नालंदा ने पढ़ना सिख लिया था

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नालंदा यूनिवर्सिटी को यूनेस्को द्वारा वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्ज़ा दिया गया ।

यह दुनिया की सबसे प्राचीन रेज़िडेंशियल यूनिवर्सिटी में से एक नालंदा में समग्र पाठ्यक्रम था और यहां दुनिया भर से लोग पढ़ने आते थे।


जब दुनिया ने ठीक से जीना नहीं सीखा था, तब नालंदा ने पढ़ना सिख लिया था !

नालंदा में एक वक़्त था जब 2 हज़ार से अधिक शिक्षक और 10 हज़ार छात्र छात्रा पढ़ने आते थे।


अगर आप इसकी तुलना 378 साल पुरानी हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से भी करें, तो उसमें 2,400 शिक्षक और 21 हज़ार छात्र हैं।

2006 में पूर्व राष्ट्रपति ए. पी. जे. अब्दुल कलाम के द्वारा नालंदा यूनिवर्सिटी को दोबारा जीवन देने का अवसर प्राप्त हुआ । इसके लिए बिहार सरकार के द्वारा राजगीर में यूनिवर्सिटी के लिए 450 एकड़ ज़मीन खरीदी गई ।


उसके बाद नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन की अगुवाई में 2007 में परियोजना की निगरानी के लिए टीम का गठन किया गया।



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