Corona Crisis: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र पर दागे सवाल, ऑक्सीजन के छटपटा रही जनता, हम सुनना चाहते हैं

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नई दिल्ली Supreme Court Corona Crisis। सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को कोरोना महामारी केंद्र द्वारा उठाए गए कदमों को लेकर सुनवाई की गई। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से टेस्टिंग, ऑक्सीजन व वैक्सीनेशन सहित कई मुद्दों पर सवाल किए। साथ ही सोशल मीडिया पर दर्द बयां कर रहे लोगों व डॉक्टर व नर्स का भी मुद्दा उठाया। सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली के अस्पतालों में ऑक्सीजन को लेकर अफरातफरी का सवाल किया गया तो केंद्र सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वहां ऑक्सीजन की सप्लाई की गई लेकिन उनके पास इतनी क्षमता ही नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि लगातार सेवा दे रहे डॉक्टर और नर्स बहुत बुरी स्थिति में हैं। चाहे प्राइवेट हो या सरकारी अस्पताल, सभी को लगातार आर्थिक प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए। अंतिम वर्ष के 25,000 मेडिकल छात्र और 2 लाख नर्सिंग छात्रों की भी मदद लेने पर विचार किया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार राष्ट्रीय स्तर पर वैक्सीनेशन अभियान पर विचार करे। सभी लोगों को मुफ्त कोरोना वैक्सीनेशन की सुविधा दी जानी चाहिए। कोर्ट ने साफ कहा कि वैक्सीन निर्माता कंपनी पर नहीं छोड़ा जा सकता कि वह किस राज्य को कितनी वैक्सीन उपलब्ध करवाए। यह केंद्र के नियंत्रण में होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि इन्फॉर्मेशन को आने से नहीं रोकना चाहिए, हमें लोगों की आवाज सुननी चाहिए।


कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि बीते 70 सालों में स्वास्थ्य क्षेत्र में कुछ नहीं हुआ है जो महामारी के कारण उत्पन्न हालात में अभी बहुत काम करने की ज़रूरत है। बगैर ऑक्सीजन के छटपटा रही जनता को हम सुनना चाहते हैं। इस दौरान केंद्र की ओर से जवाब देते हुए सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, दिल्ली को 400 मीट्रिक टन ऑक्सीजन दिया गया, पर इसे मेंटेन करने की क्षमता उनके पास नहीं है।

एक और निर्माता ऑक्सीजन देना चाहता है लेकिन दिल्ली के पास क्षमता नहीं है इसे बढ़ाना होगा। सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने ऑक्सीजन सप्लाई के आवंटन का मुद्दा उठाया। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि केंद्र सरकार के पक्ष की हम समीक्षा करेंगे। ऑक्सीजन सप्लाई को लेकर ऐसी व्यवस्था बने कि लोगों को पता चल सके कि ऑक्सीजन की सप्लाई कितनी की गई और कौन से अस्पताल में यह कितना है।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से सवाल किया कि राष्ट्रीय स्तर पर अस्पताल में भर्ती को लेकर क्या नीति है और जिस संक्रमण मामले का RTPCR से पता नहीं लग रहा उसके लिए क्या कदम उठाए गए। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि केंद्र को वैक्सीन के निर्माण में तेजी लाने के लिए किए गए निवेश का ब्यौरा भी देना चाहिए। यह निजी वैक्सीन निर्माताओं को किए गए फंडिंग में केंद्र का अहम हस्तक्षेप होगा।

गौरतलब है कि महामारी के संकट से निपटने के लिए केंद्र सरकार द्वारा दिए गए राष्ट्रीय योजना पर विचार किया जाना है। कोर्ट ने केंद्र से स्पष्ट रूप से पूछा है कि क्या कोरोना से निपटने के लिए सेना का इस्तेमाल किया जा सकता है और टीकाकरण के अलग-अलग कीमतों का आधार और तर्क क्या हैं।



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