श्रमिक कानूनों में बदलाव, नयी फैक्टरी लगाने वालों को बिहार में मिलेंगी ये सुविधाएं

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man wearing gray shirt and welding mask covered in welding smokes
Factory

पटना : श्रमिकों से जुड़े कानून में लगातार बदलाव किया जा रहा है, जिसमें कारखाना मालिकों को सहूलियत, तो श्रमिकों पर बोझ बढ़ सकता है. इसी कड़ी में अब राज्य में जो भी नये कारखाने लगाये जायेंगे, उनको अगले एक हजार दिनों तक अपने मुताबिक काम करा सकने की सहूलियत मिलेगी.

अब स्वास्थ्य व सुरक्षा को छोड़ सरकार का कोई भी सेवा शर्त का पालन करना जरूरी नहीं होगा. इस छूट का लाभ दिलाने के लिए पिछले मॉनसून सत्र में विशेष विधेयक पारित कराया गया है. अब इस विधेयक पर राज्यपाल की सहमति ली जायेगी. श्रम कानून पर केंद्र की भी सहमति जरूरी है. छूट में सरकारी प्रक्रिया निवेश में बाधा नहीं बने, वहीं तक संशोधन किया हो रहा है. बस सरकार ने कोशिश है कि निवेशक बिना परेशानी नयी फैक्टरी लगा सकें.


मध्यप्रदेश के तर्ज पर दी गयी सहूलियत : 

श्रम संसाधन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक बिहार ने मध्यप्रदेश के तर्ज पर ही कारखाना लगाने वालों को सहूलियत दी है.श्रम कानूनों के कारण निवेशकों को किसी तरह की परेशानी नहीं हो, वैसी ही नीति बनायी गयी है. वहीं, कर्मियों की सेवा शर्त के अलावा औद्योगिक विवाद अधिनियम में भी छूट दी गयी है. साथ ही जब कारखाना बंद करेंगे, तो उसमें भी छूट दी जायेगी.

विभाग के मुताबिक मजदूरों के हितों का रखा गया है ध्यान : 

नये कानून में मजदूरों के हितों का कोई नुकसान नहीं हो. इसलिए स्वास्थ्य और सुरक्षा का ध्यान रखा गया है. नयी नीति से अधिक मजदूरों को काम मिल सकेगा.सरकार की यह कोशिश जरूर है, लेकिन इस प्रयास में मजदूरों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गयी है. कोई फैक्टरी संचालक मजदूरों का शोषण नहीं कर सके ऐसी व्यवस्था हर हाल में बनायी गयी है.

कारखाना मालिकों को यह छूट भी रहेगी

  • बिना पावर वाली फैक्टरी में 20 के बदले 40 कर्मी होने पर मिलेगा लाइसेंस.
  • 300 से कम कर्मचारी वाले कारखाने को बंद करने में रियायत.
  • मजदूरों के काम की अवधि आठ घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे की गयी है.
  • 50 से कम मजदूर से काम कराने पर ठेकेदारों को लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं.
  • एक हजार दिन यानी लगभग ढाई साल तक कर्मियों से बिना किसी सेवा शर्त के काम लेंगे कारखाना मालिक


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