बिहार में बाढ़, NDRF एवं SDRF ने कस ली है कमर. आप भी रहे चौकन्ना!

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बिहार में हो रही लगातार बारिश अब एक बहुत बड़ी परेशानी का रूप ले रही है. कल तक जो नदियां खतरे के निशान को छूने को थी वो अब हर सीमा पार कर चुकी हैं. प्रदेश को बारिश के कारण भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. जनजीवन बेहाल है. ट्रैफिक की लम्बी कतारें, जगह जगह भरा हुआ पानी और नालों से निकलता हुआ कचरा शहरों का रूपक जान पड़ता है. गांव में पशु एवं खेत खलिहान पानी के कुछ यूँ ढक गए हैं की उनका नामों निशान तक नहीं दिख रहा.
पिछले 54 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ने वाली ये बारिश अब एक खतरा बन चुकी है. उत्तर बिहार में जलस्तर 200 लाख क्यूसेक को पर कर चूका. जगह जगह नदियां उफान पर हैं. प्रकृति का ऐसा क्रोध सामने दिख रहा है जिससे शायद बचा जा सकता है पर फ़िलहाल उसका सामना करना ही एक मात्र चारा है. सरकार सक्रिय है किसी भी आपदा से बचने के लिए. जो पुल टूट रहे हैं उनकी मरम्मत के लिए एक टीम को 24 घंटे तैनात करने का फैसला किया गया है. मोतिहारी में NDRF एवं शिवहर में SDRF की टीमों को भेज दिया गया है.
बिहार हर साल इस मौसम में बाढ़ की चपेट में आता है. इसका ज़िम्मेदार तो कोई नहीं पर कुछ चीज़े हैं जिनसे बचा जा सकता है. प्रकृति को सहजता से इस्तेमाल किया जाना पसंद है. हिमालय में जंगलों को बेधड़क काटा जा रहा है जिससे इन नदियों का बहाव पहले रुकता था या धीमा था. सरकार ऐसे तरीकों को अगर पहले से हीं अपने दिमाग में रखे तो शायद इस जन जागरूकता से इस विध्वंश को कम किया जा सकता है.



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