बिहार में नल जल योजना के सोशल ऑडिट से नपेंगे लापरवाह अधिकारी, केंद्रीय टीम भी रहेगी साथ, जानें कैसे करेगी जांच

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मुख्यमंत्री नल जल योजना के तहत एक करोड़ 40 लाख से अधिक घरों में शुद्ध नल का जल पहुंचा दिया गया है. योजना के तहत अगले पांच वर्षों तक लोगों को नियमित शुद्ध जल मिले, इसके लिए राज्य सरकार ने सोशल ऑडिट कराना शुरू किया है. इससे योजना में हुई गड़बड़ी की पहचान हो रही है. वहीं, इस सोशल ऑडिट को अब केंद्र सरकार भी देखना चाहती है.

केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को पत्र लिखा है कि सोशल ऑडिट के समय केंद्रीय टीम बिहार आयेगी और वह ऑडिट टीम के साथ रहेगी, ताकि यह पता चल सके कि ऑडिट से योजना को कितना फायदा मिल रहा है. अगले माह दोबारा से सोशल ऑडिट शुरू होना है. केंद्र सरकार ने बाकी राज्यों को भी कहा है कि बिहार सरकार ने जिस तरह से योजना को नियमित चलाने के लिए सोशल ऑडिट का सहारा लिया है यह बाकी राज्य भी लागू करें, ताकि लोगों को शुद्ध जल मिल सके.


पीएचइडी ने 56 हजार से अधिक वार्डों में नल जल योजना के तहत पानी पहुंचाया गया है. इसकी निगरानी रखने के लिए सोशल ऑडिट कराने का निर्णय लिया है.इसके आधार पर विभाग रिपोर्ट तैयार करेगा उसके बाद वैसे संवेदकों व अधिकारियों पर कार्रवाई होती है, जिसकी वजह से संवेदक ठीक से काम कर रहे हैं. आज लोग सोशल ऑडिट में शिकायत कर रहें हैं.

ये होता है तकनीकी ऑडिट :

-पाइप, मोटर, टोटी की क्वालिटी

-कितनी गहराई में पाइप डाला गया

-जहां तक पाइपलाइन को बिछाना था. पाइप कितना डालना था . कितना पाइप डाला गया है. अगर नहीं तो क्यों .

पाइप की क्वालिटी

-खराब रहने से लाइफ और पानी की क्वालिटी पर कितना असर पड़ेगा. इसकी जांच होगी.

ऐसे होगा ऑडिट:

-ग्रामीण विकास विभाग के नियंत्रण में सामाजिक अंकेक्षण सोसाइटी को दी गयी जिम्मेदारी.

-सोसाइटी की टीम हर गांव में चार दिनों तक घर-घर जाकर करेगी पूछताछ.

-5वें दिन आमसभा कर जनप्रतिनिधि की उपस्थिति में लोगों से ली जायेगी राय .

-रिपोर्ट के आधार पर होगा सुधार .

-गड़बड़ी मिलने पर तय होगी जिम्मेदारी दोषियों के खिलाफ की जायेगी कार्रवाई.



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