बढ़ने लगी है सिहरन, रैनबसेरों में निराश्रितों के लिए किए गए व्यवस्था से खुश दिखे लोग

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बिहार में ठंड ने दस्तक दे दी है और इसी के साथ ही परेशानी उन लोगों के लिए बढ़ गई है जिनके पास रहने के लिए छत नहीं है. लिहाजा पटना नगर निगम ने ऐसे लोगों के लिए खास पहल की है. गायघाट पुल के नीचे निगम ने रैनबसेरा में निराश्रित लोगों के लिए रहने और खाने के इंतजाम किए गए हैं.

स्वच्छ किचन, थाली में गरमा गरम रोटी और सब्जी, साथ में खाने के दौरान मनोरंजन के लिए टीवी की भी व्यवस्था और पीने के लिए आरओ का पानी. राजधानी के गायघाट इलाके में निगम ने जो रेन बसैरा बनाया है, वहां इस बार निराश्रित लोगों के लिए बेहतर व्यवस्था की कोशिश की गई है. 


खाने के लिए हर व्यक्ति को एक टाइम के तीस रूपए देने होते हैं. निराश्रित लोग भी इस व्यवस्था से खुश नजर आ रहे हैं.  

इस रैनबसेरा में खाने के साथ रहने की भी व्यवस्था है. महिलाओं के लिए अलग और पुरुषों के लिए भी अलग. अभी 50 बेड लगाए गए हैं. महिलाओं के लिए 28 और पुरुषों के लिए 22 बेड 26 नवंबर से शुरू किए गए. इस रेनबसेरे को देखकर ऐसा नहीं लगता कि ये कोई सरकारी रैनबसेरा है. क्योंकि यहां भी सफाई का ध्यान रखा गया है. नई चौकी खरीदी गई है. कंबल, बेड और नई मच्छरदानी भी लगाई गई है. ताकि जो लोग दिन भर काम करने या फिर जो निराश्रित हैं, वो आकर यहां कड़ाके की सर्दी में चैन की नींद ले सकें. 

आने जाने वाले लोगों का रिकॉर्ड रखने के लिए आधार कार्ड की फोटोकॉपी रखी गई है. यहीं नहीं पुरुषों और महिलाओं के लिए शौचालय के भी इंतजाम किए गए हैं. 

हालांकि, पटना की आबादी के हिसाब से और भी रैनबसेरों की जरूरत हैं, लेकिन गायघाट इलाके में निगम ने जो व्यवस्था की है अगर वैसी व्यवस्था दूसरे रैनबसेरों में हो जाए तो कड़ाके की ठंड भी लोगों के लिए मुश्किल साबित नहीं हो पाएगी. 



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