चमकी बुखार से होने वाली बच्चों की मौतों में लीची मुख्य वजह नहीं : आईएमए

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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की एक टीम ने कहा है कि बीमारी से प्रभावित बच्चों में नवजात भी हैं, इसलिए चमकी बुखार की मुख्य वजह लीची नहीं मानी जा सकती

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के एक दल ने कहा है कि बिहार के मुजफ्फ़रपुर में इन्सेफ्लाइटिस (चमकी बुखार) से होने वाली बच्चों की मौतों में ‘लीची’ खाना मुख्य वजह नहीं है क्योंकि इससे नवजात भी प्रभावित हुये हैं. बीमारी से हुयी मौतों की जांच करने वाले इस दल ने कहा कि कुपोषण, गर्मी और उमस बीमारी की बड़ी वजह हैं.
चार सदस्यों वाली आईएमए की टीम ने कहा कि बीमारी की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य जागरूकता पर केंद्रित एक कार्यक्रम चलाने के साथ बच्चों को मुफ्त में खाना देना होगा. खासकर रात के खानेे पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है. इसके अलावा ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) का घोल सार्वजनिक रूप से मुहैया किया जाना चाहिये. आईएमए की टीम ने कहा कि इस बीमारी की वजह के बारे में निश्चित तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता, लेकिन अधिक गर्मी, नमी और उमस इसमें एक भूमिका निभाते हैं, लेकिन लीची खा लेना इसकी मुख्य वजह नहीं हो सकती है. टीम ने बताया गुनगुने पानी से स्पंज, अधिक मात्रा में पानी पीने और पर्याप्त भोजन लेने से इस बीमारी में फायदा मिल सकता है.
रविवार को बिहार के मुजफ्फ़रपुर में दो और बच्चों की एक्यूट इन्सेफिलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से मौत हो गई. इसे स्थानीय लोग ‘चमकी बुखार’ भी कहते हैं. राज्य के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इस बीमारी की वजह से राज्य के 20 जिलों में 152 मौतें हो चुकी हैं



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