किन मरीजों को नहीं लेनी चाहिए कोरोना के इलाज में इस्‍तेमाल होने वाली रेमडेसिविर दवा

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पूरी दुनिया में कोरोना का प्रकोप डेढ़ वर्ष बाद भी जारी है। ऐसे में इसकी रोकथाम को दी जाने वाली दवाओं को लेकर भी विशेषज्ञ लगातार अपनी सलाह और चेतावनी दे रहे हैं। ऐसी ही एक चेतावनी अब दिल्‍ली स्थित एम्‍स के विशेषज्ञों ने सलाह दी है। इन विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना संक्रमित ऐसे मरीज जो घर पर ही आइसोलेशन में है उनको इसके इलाज में इस्‍तेमाल की जाने वाली दवा रेमडेसिविर नहीं लेनी चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि संक्रमण होने पर उनका आक्‍सीजन लेवल 94 से नीचे चला जाता है तो भी उन्‍हें इस दवा का अपने आप से सेवन नहीं करना चाहिए बल्कि उन्‍हें तुरंत अस्‍पताल में भर्ती हो जाना चाहिए।

विशेषज्ञों ने इस बात की सलाह एक वेबिनार के दौरान दी है। ये वेबिनार कोरोना मरीजों के लिए ‘मेडिकेशन एंड केयर इन होम आइसोलेशन’ विषय पर था। इस वेबिनार में शामिल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थान (एम्स) के डा. नीरज निश्चल ने इस दौरान बताया कि ने होमकेयर वालों को स्‍वयं से रेमडेसिविर का इस्‍तेमाल नहीं करना चाहिए। उनके मुताबिक ऐसे मरीजों के लिए पॉजीटिव रुख के साथ रोजाना हलका व्‍ययाम जरूरी है। इन सबसे उन्‍हें राहत मिलेगी। एम्‍स के ही एक अन्‍य डॉक्‍टर मनीष का कहना था कि आक्‍सीजन लेवल 94 के नीचे जाने पर तुरंत अस्‍पताल में भर्ती होना जरूरी है। उनके मुताबिक आक्‍सीजन लेवल को देखते समय इस बात का भी ध्‍यान रखना चाहिए कि मरीज की उम्र क्‍या है और उसको पहले से कौन-कौन सी बीमारी हैं।


इन विशेषज्ञों का कहना है कि 80 फीसद कोरोना संक्रमित रोगियों में बेहद हल्के लक्षण होते हैं। इसमें ये बात भी उभर कर सामने आई कि यदि मरीज की पहली जांच रिपोर्ट नेगेटिव आती है तो उन्‍हें दोबारा कुछ दिन बाद आरटीपीसीआर करानी चाहिए। इसके अलावा उन्‍हें पूरा आराम करना चाहिए। विशेषज्ञों ने इस दौरान ये भी कहा कि कोरोना संक्रमण के दौरान मरीज को समय पर दवा और पूरी खुराक लेनी बेहद जरूरी है। एम्‍स के विशेषज्ञों के मुताबिक 60 वर्ष से अधिक उम्र के मरीजों और हाई ब्‍लडप्रेशर, डायबिटीज, हृदय रोग, किडनी और लंग्‍स से जुड़ी बीमारियों वाले मरीज होमकेयर में जाने से पहले एक बार डॉक्‍टरों की सलाह जरूर लेनी चाहिए। होम आइसोलेशन के दौरान एहतियात बेहद जरूरी है।



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