ब‍िहार ने विश्व के सुपर पावर अमेरिका को आखिर किस बात में छोड़ा पीछे, जानें

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बिहार के कृषि मंत्री अमरेन्द्र प्रताप सिंह ने राज्‍य में 55 लाख मैट्रिक टन उत्पादन मक्के का होता है. तमिलनाडु के बाद बिहार देश में दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है मक्के का, लेकिन ये बिहार का दुर्भाग्य है की मक्का का बड़ा बाज़ार होने के बावजूद बिहार के लगभग 92 प्रतिशत मक्का बिहार के बाहर चला जाता है.

बिहार ने अमेरिका को पीछे छोड़ दिया , ये ख़बर अपने आप में ही हर बिहारी को गर्व का अनुभव कराने के लिए काफ़ी है, लेकिन ये सच है. बिहार के सात ज़िलों ने मक्का के उत्पादन में अमेरिका के उन इलाक़े को पीछे छोड़ दिया है जो अभी तक विश्व में सबसे अधिक मक्का का उत्पादन करते थे, अभी तक अमेरिका के उन इलाक़ों में सबसे अधिक 48 क्विंटल प्रति एकड़ का उत्पादन होता था लेकिन बिहार के सात ज़िले में उत्पादन 50 क्विंटल प्रति एकड़ हो गई है जो विश्व रिकार्ड है.


आख़िरकार बिहार के जिन इलाकों ने ये कारनामा कर दिखाया है वो जिले है पूर्णिया, कटिहार, भागलपुर, मधेपूरा,सहरसा, ख़गड़िया और समस्तीपुर है. ज़ाहिर है ये ज़िले मक्का उत्पादक के रूप में देश के मानचित्र पर उभर कर आए है. 2016 में ही बिहार को मक्के के सर्वश्रेष्ठ उत्पादक राज्य के रूप में कृषि कर्मण पुरस्कार मिल चुका है.

बिहार जैसे राज्य के लिए ये ख़बर बेहद उत्साह बढ़ाने वाली है. बिहार के कृषि मंत्री अमरेन्द्र प्रताप सिंह ने NEWS 18 से बातचीत में कहा है क‍ि ये ख़बर बिहार के किसानों की तक़दीर बदलने वाली है. बिहार सरकार ने बड़ी तैयारी कर रखी है मक्के के उत्पादन से लेकर बाज़ार तक के लिए. कृषि मंत्री ने बताया की बिहार में 55 लाख मैट्रिक टन उत्पादन मक्के का होता है. तमिलनाडु के बाद बिहार देश में दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है मक्के का, लेकिन ये बिहार का दुर्भाग्य है की मक्का का बड़ा बाज़ार होने के बावजूद बिहार के लगभग 92 प्रतिशत मक्का बिहार के बाहर चला जाता है और इसकी कुछ प्रमुख वजह भी है….

– बिहार में मक्के का प्रोसेसिंग प्लांट का नहीं होना.
– बिहार में मक्के का कोई इनवेस्‍टर का नहीं होना.
– बिहार में बाज़ार का नहीं होना जिसकी वजह से किसान जो रेट बाज़ार में मिलता है उसी रेट में बेच देता है मक्का का रेट फ़िलहाल 2200 रुपया प्रति क्विंटल है.

लेकिन बिहार में मक्के के उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी होने के बाद बिहार के कृषि मंत्री कहते है क‍ि अब ऐसा नहीं होगा. बहुत जल्द बिहार के मक्का किसानों के लिए कई बड़े फ़ैसले लेने की तैयारी में बिहार सरकार है, बिहार सरकार की पूरी कोशिश है की केंद्र सरकार से आग्रह कर मक्के का भी एमएसपी रेट तय कराया जाए, ताकि किसानो को एमएसपी रेट पर मक्का बिक सके और बाज़ार का भाव भी. बढ़ सके ताकि किसान अच्छे रेट पर अपने मक्के को बेच सके .

बिहार के किसानों को निर्यातक बनाने की तैयारी है ताकि बिहार के किसान अच्छे दाम मक्के का पा सके और उत्साहित भी हो. बिहार में बड़े पैमाने पर मक्के का प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की तैयारी हो रही है ताकि मक्के के ज़्यादा से ज़्यादा उत्पाद बिहार में ही बनाया जाए और फिर उसको देश के दूसरे राज्यों के साथ साथ विदेशों में भी बेचा जा सके. फ़िलहाल पंजाब बिहार के मक्के का सबसे बड़ा ख़रीदादर है, साथ ही मक्के से इथेनॉल भी बनाया जाता है. इस लिए इथेनॉल की फ़ैक्ट्री भी लगाई जाएगी.

मक्का किसानों के लिए बिहार में भी एफपीओ यानी फ़ारमर्स प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजर बनाने की तैयारी भी हो रही है, जिसमें किसानों का रजिस्ट्रेशन कराया जाएगा जो कंपनी एक्ट के अनुसार होगा और सरकार उसमे आर्थिक मदद भी देगी. बहरहाल मक्के के किसान भी बेहद उत्साहित है और सहरसा के एक मक्का किसान रामानुज राय कहते है, अगर बिहार सरकार हमारी मदद करती है और बिहार में ही प्रोसेसिंग यूनिट लगा बाज़ार उपलब्ध कराने में मदद करती है तो आने वाले समय में बिहार के किसान ना सिर्फ़ आर्थिक रूप से मज़बूत होंगे बल्कि बिहार की आर्थिक हालात को भी बेहतर बना देंगे.



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