ना बैंड, ना बाजा ना बाराती, दुल्हन को अकेला ही घर ले आया दुल्हा

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मंडी: शादी को लेकर परिवार के बहुत से सपने और अरमान होते हैं। घर का इकलौता बेटा हो तो फिर धूमधाम से शादी का सपना हर पिता सजाता है। वर्तमान हालात में शादी को लेकर सरकार के नियमों का पालन करना भी जरूरी है। ऐसे में एक पिता और परिवार ने शादी को लेकर इन अरमानों को दरकिनार कर दिया है। मंडी के एक परिवार में शादी हुई, परंतु इस शादी में ना बैंड था, ना बाजा और ना ही बारात थी। दुल्हा अकेला ही दुल्हन को घर लेकर आ गया और परिवार ने वर्चुअली दुल्हा-दुल्हन को आशीर्वाद प्रदान किया। कोरोना के बढ़ते केस के देखते हुए सरकार ने शादियों में 50 लोगों की अनुमति प्रदान की है। हालांकि कुछ लोग इन नियमों का पालन भी कर रहे हैं और कुछ उल्लंघन में कर रहे हैं। कोरोना काल में मंडी के परस राम सैनी और उनके परिवार ने एक ऐसा उदाहरण पेश किया है, जिसकी हर तरफ प्रशंसा हो रही है। इकलौते बेटे की शादी के सारे अरमानों को छोड़ते हुए परिवार ने बगैर किसी तामझाम के शादी समारोह का आयोजन किया। यहां तक कि बेटे के साथ उसके माता-पिता बारात में भी नहीं गए। दुल्हन को लाने के लिए दूल्हा अकेले ही गया, माता-पिता ने घर पर वीडियो देखकर वर-वधू को वर्चुअली आशीर्वाद दिया।

महामारी के इस दौर में सरकार ने शादियों पर पाबंदियां तो नहीं लगाई हैं, लेकिन उसमें जुटने वाली भीड़ को कम करने की बंदिशें जरूर लगाई है. बावजूद इसके लोग भीड़ जुटाने से गुरेज नहीं कर रहे हैं। ऐसे में मंडी शहर निवासी परस राम सैनी और उनके परिवार ने एक ऐसा उदाहरण पेश किया है, जिसकी तारीफ हो रही है। सीनियर सेकेंडरी स्कूल बॉयज के प्रधानाचार्य परस राम सैनी के इकलौते बेटे प्रांशुल सैनी की शादी की तारीख फरवरी में ही तय हो गई थी। बेटे की शादी को लेकर माता-पिता के कई अरमान थे, लेकिन कोरोना की दूसरी लहर ने ऐसा कहर बरपाना शुरू किया कि शादी समारोह छोटे हो गए। परस राम सैनी के बेटे की बारात मंडी से गुजरात के अहमदाबाद जानी थी। ऐसे में परिवार ने दुल्हन लाने के लिए सिर्फ दुल्हे को ही भेजने का फैसला किया। दूल्हा प्रांशुल फ्लाइट से अहमदाबाद पहुंचा और आज मनोवी के साथ सात फेरे लिए। प्रांशुल के माता-पिता ने अपने बेटे की शादी में वर्चुअली भाग लिया और घर बैठे अहमदाबाद में हो रहे शादी समारोह को देखा। यहीं से ही उन्होंने वर-वधु को आशीर्वाद दिया। परस राम सैनी ने बताया कि उन्हें बेटे की शादी में शामिल न होने का मलाल तो है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि भीड़ इकट्ठी करके ही शादी की जाए। जब समाज पर आफत हो तो ऐसे समारोह को टालना ही बेहतर है। सैनी के अलावा परिवार के अन्य रिश्तेदार भी मंडी से ही शादी समारोह में वर्चुअली शामिल हुए। प्रांशुल अपने माता-पिता का इकलौता चिराग है। उसने आईआईटी गांधीनगर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। इसके बाद जर्मनी और अमेरिका में रिसर्च किया। गुजरात के अहमदाबाद में नौकरी के दौरान उनकी मुलाकात मनोवी से हुई और दोनों ने शादी करने का निर्णय लिया। प्रांशुल सैनी अभी मंडी में अपनी एक निजी कंपनी चला रहे हैं। कोरोनाकाल में प्रांशुल सैनी के परिवार की पहल की सभी लोग तारीफ कर रहे हैं।




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